प्रकाशन का समय : सुबह
भारत स्वच्छ ऊर्जा में एक बड़ा बदलाव ला रहा है। अब नवीकरणीय ऊर्जा की कुल स्थापित क्षमता 52% हो चुकी है, और सौर मॉड्यूल, सेल और पवन टरबाइन का घरेलू उत्पादन बहुत तेजी से बढ़ रहा है। ये सब औद्योगीकरण को बढ़ावा दे रहा है, लाखों नौकरियां पैदा कर रहा है और वैश्विक बाजार में भारत को मजबूत बना रहा है। दावोस 2026 में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इसको उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक आदर्श मॉडल बताया।

ग्रीन पावर का शेयर बढ़ता जा रहा है
भारत की कुल बिजली क्षमता अब 510 गीगावॉट से ज़्यादा हो गई है (2026 तक)। इसमे से स्वच्छ ऊर्जा स्रोत जैसे सौर, पवन और हाइड्रो मिलकर 258-262 गीगावॉट के आस-पास हैं – मतलब नवीकरणीय अब कुल का आधार से भी ज्यादा! सोलर अकेला ही लगभाग 136 गीगावॉट पर पहुंच गया, हवा 47 गीगावॉट के आसपास है। 2025 में भारत ने रिकॉर्ड 45-50 गीगावॉट ग्रीन पावर ऐड किया – ये एक साल का सबसे बड़ा एडिशन था। इसमें कोयला जैसा गंदा ईंधन काम हो रहा है और जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मदद मिल रही है। सरकार का लक्ष्य है 2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म बिजली – स्वच्छ भविष्य के लिए ठोस योजना चल रही है।
स्थानीय विनिर्माण में तेज़ वृद्धि
देसी प्रोडक्शन फुल स्पीड पर चल रहा है। सौर पैनल विनिर्माण क्षमता 2025 के अंत तक 144 गीगावॉट प्रति वर्ष हो गई (पहले साल सिर्फ 41 गीगावॉट थी)। सौर कोशिकाओं का उत्पादन भी 24 गीगावॉट तक पहुंच गया। पवन टरबाइन के पार्ट्स भी भारत में ही बनने लगे हैं। पीएलआई योजना से कारखानों को सीधा पैसा मिल रहा है, इसका विस्तार हो रहा है। 2026 के मध्य में नियम आएंगे कि परियोजनाओं में स्थानीय सौर कोशिकाओं का उपयोग करना अनिवार्य होगा – चीन से आयात कम होगा। अब इंडिया बायर से मेकर बन रहा है। जल्दी ही मॉड्यूल क्षमता 172 गीगावॉट और सेल 80 गीगावॉट तक पहुंचने वाली है। ये पैसा बचाता है और आत्मनिर्भरता बढ़ाता है।
नौकरियाँ और फ़ैक्टरियों का बड़ा फ़ायदा
ये स्वच्छ ऊर्जा बूम अर्थव्यवस्था को बदल रहा है। विनिर्माण, स्थापना और रखरखाव में करोड़ों नौकरियाँ बन रही हैं। सोलर फैक्ट्रियों में 2025 में ही हजारों लोगों को काम मिला, बहुत सारी महिला कर्मचारी भी हैं। स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उद्योगों को भी ऑर्डर मिल रहे हैं। राज्यों में औद्योगीकरण चल रहा है। सोलर पार्ट्स का निर्यात भी बढ़ रहा है – वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत मजबूत हो रहा है। 2025 में लगभाग 2 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया। छोटे व्यवसाय और कौशल डोनो आगे बढ़ रहे हैं।
दावोस से ग्लोबल मॉडल
दावोस 2026 में मंत्री जोशी ने भारत की कहानी को सबके सामने रखा – बोला ये तेज विकास, कम लागत और ग्रह देखभाल का सबसे अच्छा मिश्रण है। छत पर सौर घरों के लिए और सौर पंप किसानों के लिए – सबके लिए स्वच्छ ऊर्जा आसान बना रहे हैं। 2030 तक वैश्विक निवेशकों के लिए 300-350 बिलियन डॉलर के अवसर हैं। ये मॉडल गरीब देशों को दिखाता है कि विकास रोके बिना हरित ऊर्जा अपनाएं। भारत साबित कर रहा है कि उभरती अर्थव्यवस्थाएं भी स्वच्छ ऊर्जा में अग्रणी बन सकती हैं, नौकरियां पैदा करती हैं और मजबूत रहती हैं।
भारत का ये स्वच्छ ऊर्जा बूम बिल्कुल ताज़ा और पूरा वादा वाला है। चुनौतियों के साथ अवसरों में बदलाव आ रहा है और देश को हरित विकास का नेता बनाया जा रहा है।
खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।
स्वतंत्र समाचार प्रकाशक जो वैश्विक मामलों, आपूर्ति श्रृंखलाओं और सार्वजनिक नीति पर ध्यान केंद्रित करता है – और सब कुछ सत्यापित रिपोर्टिंग के साथ!






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