प्रकाशन का समय : सुबह
भाई लोग, छोटे और मध्यम व्यवसायों को अब बड़ी मदद मिलने वाली है! केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) में 5,000 करोड़ रुपये के इक्विटी निवेश को मंजूरी दे दी है। सिडबी वो बैंक है जो सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को लोन देता है। ये बिजनेस हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं – करोड़ लोगों को नौकरी देते हैं, लेकिन अक्सर पैसे की दिक्कत होती है।

कैबिनेट ने क्या फैसला लिया?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की कुर्सी पर कैबिनेट ने ये फैसला लिया ताकि एमएसएमई को ज्यादा क्रेडिट मिले और रोजगार पैदा हो। छोटे कारोबार को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी, नौकरियां बढ़ेंगी और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
पैसे कैसे आएंगे – फेज्ड प्लान
कुल 5,000 करोड़ रुपये टीन स्टेज में आएंगे। पहले वित्त वर्ष 2025-26 में 3,000 करोड़ रुपये डाले जाएंगे, बुक वैल्यू 568.65 रुपये प्रति शेयर पे (31 मार्च, 2025 तक)। बाकी 2,000 करोड़ रुपये – 1,000 करोड़ रुपये हर साल वित्त वर्ष 2026-27 और वित्त वर्ष 2027-28 में, उस समय के बुक वैल्यू पर। इसे सिडबी आर्थिक रूप से मजबूत रहेगा और ज्यादा अच्छे से ऋण दे सकेगा।
एमएसएमई को ज़्यादा लोन और ग्रोथ मिलेगा
क्या पूंजी से सिडबी बहुत ज्यादा एमएसएमई को सपोर्ट करेगा। अभी तक लगभग 76.26 लाख व्यवसायों को मदद मिल रही थी, अब वित्त वर्ष 2028 तक ये बढ़कर 102 लाख हो जाएगा – मतलब करीब 25.74 लाख नए लाभार्थी! छोटे व्यवसायियों को आसान से लोन मिलेगा, प्रतिस्पर्धी दरें पे। ग्रीन फाइनेंस भी बूस्ट मिलेगा – पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं के लिए विशेष मदद।
नौकरियाँ बनेंगी और अर्थव्यवस्था मजबूर होगी
हर एमएसएमई का औसत 4.37 लोगों को नौकरी देता है। क्या अतिरिक्त सहायता से 2028 तक 1.12 करोड़ नई नौकरियाँ बनने की उम्मीद है। भारत में एमएसएमई में पहले से ही 30 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलता है। ये गुमनाम नायकों को स्पॉटलाइट मिल रहा है – आखिरकार उनकी वैल्यू समझ जा रही है!
ये कदम छोटे धंधो के लिए गेम-चेंजर है। अब उनके पास पैसे और विकास के मौके ज्यादा होंगे।
खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।
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