प्रकाशित समय : दोपहर
समानता की तरफ एक ऐतिहासिक कदम
उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को पूरा एक साल पूरा कर लिया है। ये कानून 27 जनवरी 2025 से लागू हुआ था। स्वतंत्र भारत में उत्तराखंड पहला राज्य बना जो सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, विरासत और दूसरे व्यक्तिगत मामलों में सामान्य नियम लागू किया, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो। अब राज्य में 27 जनवरी को “यूसीसी डे” के रूप में जश्न मनाया जाता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस समानता और महिला सशक्तिकरण का बड़ा कदम कहते हैं।
यूसीसी सरल और स्पष्ट नियम लाया गया है। इसने पुराने आचरणों को ख़त्म कर दिया जो धर्म के आधार पर लोगों के साथ अलग-अलग व्यवहार करते थे। सिर्फ एक साल में हाय ये कानून बहुत सारी जिंदगी को बदल चुका है। ऑनलाइन सिस्टम की वजह से प्रक्रियाएं बहुत आसान और तेज़ हो गई हैं।

पहले साल की शानदार सफलता
पिछले साल के नतीजे बहुत प्रभावशाली हैं। यूसीसी से पहले विवाह पंजीकरण में बहुत समय लगता था और कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते थे। अब सब कुछ ऑनलाइन हो जाता है। कपल्स कहीं से भी अप्लाई कर सकते हैं। क्या बदलाव की वजह से एक साल से भी कम समय में 4 लाख 74 हजार से अधिक विवाह रजिस्टर हो चुके हैं। मतलब हर दिन लगभाग 1400 रजिस्ट्रेशन!
ये कानून महिलाओं को ज्यादा सुरक्षित महसूस कराता है। लिव-इन रिलेशनशिप को अब रजिस्टर करना जरूरी है। इस पार्टनर्स, खास कर महिलाएं, धोखा या अकास्मिक छोड़ने से सुरक्षित रहते हैं। सीएम धामी कहते हैं कि हलाला और इद्दत जैसे मामले अब बिल्कुल नहीं हुए, जो कुछ लोगों के लिए अनुचित थे। यूसीसी विरासत और तलाक में सबके लिए समान अधिकार देता है।
लॉग सिस्टम पर ज्यादा भरोसा करते हैं क्योंकि यह पारदर्शी है। अलग-अलग पर्सनल लॉ से कन्फ्यूजन ख़त्म हो गया। सद्भाव और न्याय आया है बिना किसी समुदाय को लक्ष्य दिए।
2026 का साहसिक नया संशोधन
जब पहला साल ख़त्म होने वाला था, उत्तराखंड ने फिर से इतिहास बना दिया। 26 जनवरी 2026 को सरकार ने समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2026 लाया। गवर्नर लेफ्टिनेंट जनरल गुरमित सिंह (सेवानिवृत्त) ने इसे मंजूरी दी और तुरेंट इफेक्ट में ला दिया।
क्या संशोधन से यूसीसी मजबूत और सुचारू बन गया है। इसमे लगभाग 15 बदलाव हैं। प्रक्रियात्मक नियम नए हैं, प्रशासनिक कदम बेहतर हैं और दंड भी सख्त हो गए हैं। मकसद था पहले साल में जो छोटी समस्याएं दिखीं थी उनको ठीक करना और कानून को व्यावहारिक बनाना।
एक बड़ा बदलाव, पुराने सन्दर्भों को अपडेट करता है। दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की जगह अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 का उपयोग होता है। इस यूसीसी इंडिया के नवीनतम आपराधिक कानूनों के साथ संरेखित हो गया है।
नागरिकों के लिए बेहतर सुरक्षा
संशोधन का फोकस रिश्तों में सुरक्षा पर है। शादी और लिव-इन पार्टनरशिप में धोखाधड़ी या जबरदस्ती पर सख्त दंड लगा दिए गए हैं। मिसाल के तौर पर, लिव-इन रिलेशनशिप ख़त्म करने के लिए उचित प्रक्रिया, कुछ मामलों में सर्टिफिकेट ज़रूरी है। इसका दुरुपयोग रोका जाता है और कमजोर लोगों को सुरक्षा मिलती है।
अपील के विरुद्ध दंड देना अब आसान हो गया है। अवैतनिक जुर्माना को भू-राजस्व की तरह वसूल किया जा सकता है। उप-रजिस्ट्रारों को स्पष्ट दिशानिर्देश मिल गए। ये सब कदम सिस्टम को कुशल और निष्पक्ष बनाते हैं। विवाह पंजीकरण के नियमों में कुछ मामलों में ढील दी जाएगी। कपल्स को ज्यादा टाइम मिलता है। डिजिटलीकरण और नागरिकों के लिए सहजता पर ध्यान केंद्रित करना हुआ है।
लोगों और नेताओं की प्रतिक्रियाएँ
बहुत लोग संशोधन की तारीफ कर रहे हैं। सीएम धामी कहते हैं उत्तराखंड दूसरे राज्यों को रास्ता दिखा रहे हैं। वो यूसीसी को पारदर्शिता और सरलता का मॉडल कहते हैं। समर्थक इसे महिला सशक्तिकरण और बाल अधिकार संरक्षण का टूल मानते हैं।
कुछ समूहों को चिंता है। उन्हें लगता है सांस्कृतिक परंपराओं पर असर पड़ सकता है। लेकिन सरकार कहती है कानून सबके साथ बराबर है और किसी धर्म को निशाना नहीं बनाता।
क्या यूसीसी पूरा भारत का भविष्य है?
समान नागरिक संहिता भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में एक लक्ष्य है। उत्तराखंड ने इसे पहले हकीकत बना दिया। एक साल की सफलता और साहसिक नए संशोधन के साथ राज्य ने उदाहरण स्थापित किया। दूसरे राज्य बारल ध्यान से देख रहे हैं। क्या वो फॉलो करेंगे? उच्च पंजीकरण संख्या और सकारात्मक बदलाव ये संकेत देते हैं। यूसीसी विविधता में एकता लाता है। सब नागरिकों को समान अधिकार मिलते हैं।
जब उत्तराखंड मील का पत्थर है तो जश्न मना रहा है, सवाल उठता है: क्या यही भारत का भविष्य है? बहुत लोग मानते हैं कि हां। एक समान नागरिक संहिता, शुद्ध देश में कानूनों को सरल बनाया जा सकता है और सच्ची समानता ला सकता है। उत्तराखंड की यात्रा दिखती है सावधान कदमों और दृढ़ इच्छाशक्ति से ये संभव है।
राज्य ने दो बार इतिहास बनाया, पहले यूसीसी लागू करें, और अब साहसपूर्वक सुधार करें। ये पूरे देश को बेहतर कल की तरफ प्रेरित कर सकता है।
खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।
स्वतंत्र समाचार प्रकाशक जो वैश्विक मामलों, आपूर्ति श्रृंखलाओं और सार्वजनिक नीति पर ध्यान केंद्रित करता है – और सब कुछ सत्यापित रिपोर्टिंग के साथ!
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