प्रकाशन का समय : शाम
कलियुग क्या है?
कलियुग हिंदू धर्म में एक बहुत महत्वपूर्ण अवधारणा है। ये समय के चक्र में चौथा और आखिरी युग है। प्राचीन हिंदू शास्त्रों के अनुसार, समय चार अलग-अलग युगों में चलता है। ये हैं सत्य युग, त्रेता युग, द्वापर युग और कलि युग। हर युग की अपनी खास विशेषातें होती हैं। कलियुग को अंधकार और आत्मिक पतन का युग कहा जाता है।

कलियुग कब शुरू हुआ?
परंपरागत हिंदू गणना के अनुसार, कलियुग 18 फरवरी, 3102 ईसा पूर्व को शुरू हुआ था। इसका मतलब है कि कलियुग लगभाग 5,126 साल पहले शुरू हुआ। प्राचीन विदवानों ने ये तारीख पवित्र ग्रैंडों में लिखी थी खगोलीय स्थिति के आधार पर गणना की थी। ये तिथि हिंदू परंपरा और विद्वानों द्वारा व्यापक रूप से स्वीकार की जाती है।
भगवान कृष्ण से कनेक्शन
हिंदू शास्त्रों में लिखा है कि कलियुग भगवान कृष्ण के पृथ्वी से जाने के बाद शुरू हुआ। उनके जाने से द्वापर युग ख़त्म हुआ और कलियुग शुरू हो गया। ये घाटना हिंदू संस्कृति में बहुत बड़ा आत्मिक महत्व रखता है। बहुत से लोग मानते हैं कि कृष्ण की पृथ्वी पर मौजुदगी अंधकार को दूर रखती थी।
कलियुग कितने समय तक चलेगा?
प्राचीन पोते के अनुसार, कलियुग 4,32,000 साल तक चलेगा। इसका मतलब यह है कि हम अभी इस युग के शुरुआती चरण में हैं। अभी तक सिर्फ लगभाग 5,126 साल ही बीते हैं। क्या युग के ख़त्म होने में अभी हज़ारों साल बाकी हैं।
कलियुग की विशेषातें
कलियुग को नैतिक पतन का समय बताया गया है। लोग कम इमानदार और कम आत्मिक हो जाते हैं। इस दौर में झगड़े और समस्याएं बढ़ती हैं। लेकिन, शास्त्रों में ये भी कहा गया है कि इस युग में आध्यात्मिक प्रथाएं ज्यादा शक्तिशाली होती हैं। कलियुग में सरल भक्ति से भी बहुत बड़े परिणाम मिल सकते हैं।
निष्कर्ष
हिंदू मान्यताओं के अनुसार कलियुग 5,000 साल से ज्यादा पहले शुरू हुआ। ये प्राचीन गणना देखती है कि हमारे पूर्वजों ने समय और अस्तित्व के बारे में कितना गहराई से सोचा। आप अवधारणाओं को मानो या नहीं, ये प्राचीन ज्ञान की आकर्षक अंतर्दृष्टि देते हैं। ब्रह्मांडीय चक्र का ये विचार आज भी दुनिया भर में लाखो लोगों को प्रेरित करता है।
खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।
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